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शिवपद की प्राप्ति ही परम साध्य हैं - अखिलानंद

चंदौली समाचार डेस्क • 03 अगस्त 2026, 03:58 बजे • 111 बार पढ़ा गया
शिवपद की प्राप्ति ही परम साध्य हैं - अखिलानंद

नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस साध्य, साधक व साधन पर हुयी चर्चा

पड़ाव । बहादुरपुर स्थित कामाख्या निवास के प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण के द्वितीय दिवस की कथा में सोमवार को व्यास पीठ से पुराणवक्ता अखिलानंद जी महाराज ने कहा कि परम साध्य क्या है ,और उस परम साध्य का साधन क्या है , एवं उसका साधक किस प्रकार का होना चाहिए ।‌ इस बाबत व्याख्या करते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान शिव के पद की प्राप्ति ही परम साध्य है और शिव शंकर की सेवा ही परम साधन है और उनके प्रसाद से नित्य नैमित्तिक आदि फलों की ओर से जो नि:स्पृहा होता है वही वास्तव में साधन है महाराज जी ने कहा कि वेदोक्त कर्म का अनुष्ठान करके उसके महान फलों को जो भगवान शिव के चरणों में समर्पित कर देता है वही सालोंक्यदि मुक्ति की प्राप्ति है । आगे महाराज जी ने कहा कि जिसकी जैसी भक्ति होती है उसी के अनुसार उन्हें फल की प्राप्ति होती हैं । भक्ति के साधन अनेक प्रकार के हैं कानों से उसका श्रवण करना तथा वाणी से उसका कीर्तन करना चाहिए और मन से उन महादेव का मनन करना चाहिए इन तीनों को महान साधन कहा गया हैं । उन्होंने कहा कि शिव कथा ही श्रवण करें । कीर्तन करने योग्य शिव ही है । साथ ही मनन भी उन्हीं का करें । इन महान साधनों को करने से मनुष्य साध्य तक पहुंच जाता है । भगवान उमापति महादेव के गुण , रूप , विलास तथा शिव के नाम का जप ,वैदिक मंत्र पाठ , स्तुति आदि करना ही कीर्तन कहा गया है । सत्संग के माध्यम से शिव के चरित्र को श्रवण करने पर अपनी रुचि पैदा होती हैं । श्रद्धा उत्पन्न होती है । और यह तब संभव होता है जब भूत भावन भगवान शिव की कृपा होती हैं ।कथा में मुख्य यजमान कांति जायसवाल , शेखर जयसवाल एवं निधि जायसवाल रहे । उक्त अवसर पर मुख्य रूप से ओमप्रकाश जायसवाल , कमलेश तिवारी , अजय राठौर ,अनिल गुप्ता (गुड्डू ) , बबीता जायसवाल , अंजलि राठौर , विशाल तिवारी , प्रमोद तिवारी ,शिवशंकर पटेल , सौरभ गुप्ता , आलोक पांडेय , संतोष पाठक नरेंद्र मिश्र श्रेयस शिव, वीरेंद्र जी , नितेश श्रीवास्तव , संदीप , आदि हजारों भक्तों ने कथा का रसपान किया।